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प्रलेख लेखन


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लेखन एक असाइन्मेन्ट (सौंपे गये कार्य) को शुरू करने जैसा है। इसके लिये आपको अच्छी तरह से योजनाबद्ध, तैयार, केंद्रित, प्रतिबद्ध होना पड़ेगा और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आप जो कार्य कर रहे हैं उसके प्रति आपके अंदर जज्बा होना चाहिए। यदि आप यहाँ चर्चित सभी बिंदुओं पर अमल करें तो आप एक अच्छी और सराहनीय लेख लिखने में समर्थ होंगे।

प्रलेख लिखने के प्रमुख बिंदु

सबसे पहले तो इस सच्चाई को स्वीकार कीजिये कि ऐसे बहुत कम लोग हैं जो पहली बार में ही ऐसा लिख दें जैसा वे लिखना चाहते हैं। अक्सर आपको किसी चीज की याद या कोई भी आइडिया तब आता है जब इनके आने की कोई उम्मीद नहीं होती और ये नये-नये विचार (आइडियाज) आपके दस्तावेज़ के इनपुट को बार-बार बदलते रहेंगे।

एक बार अपने विचारों को कागज पर उतार लेने के बाद आपका अगला कार्य यह होगा कि आप अपने विचारों को सरल, तार्किक, जुड़े हुये तथा स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करेंगे। इसके लिए योजना और तैयारी की आवश्यकता होती है जिसके लिए आप इन निर्दिष्ट चरणों का पालन कर सकते हैं −

  • उपयुक्त भाषा का प्रयोग करें
  • सरल भाषा का प्रयोग करें (विशिष्ट शब्दावली से बचें)
  • सरल वाक्य बनाएं
  • संबंधित सामग्री का प्रयोग करें
  • बुलेट प्वाइंट्स का प्रयोग करें
  • संक्षिप्तता बनाएं रखें
  • निरन्तर सुधार करें

शोध करें

किसी भी विषय पर लिखने से पहले उस विषय के बारे में जानकारी हासिल करना एक अहम कदम है। आपका स्रोत विश्वसनीय और स्वीकार्य होना चाहिए। अपना विषय चुनने से पहले उस विषय से संबंधित हर तरह की जानकारी प्राप्त कीजिये। ये जानकारियाँ आप किताबों, लेखों, पत्रिकाओं, समाचार तथा पत्रिकाओं के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं। आजकल लोग वीडियो और ऑडीओ रिकॉर्डिंग का भी प्रयोग करते हैं। निम्नलिखित स्टेप्स (चरणों) से आपको काफी मदद मिलेगी −

  • महत्वपूर्ण और प्रासंगिक विवरणों को नोट करें
  • विषय से जुड़े प्रत्येक बिंदु और अपने दस्तावेज़ के उद्देश्य का मूल्यांकन करें
  • आप जिन स्रोत तथा उद्धरण का इस्तेमाल करें उनका विवरण भी लिखें (जैसे कि लेखक का नाम, शीर्षक और प्रकाशन)
  • विषय वस्तु के सामग्री को उचित शीर्षकों तथा उपशीर्षकों के तहत तार्किक क्रमानुसार सुनियोजित करें

उद्देश्य

अपने पाठकों के बारे में जानने से अपको विषय-वस्तु तैयार करने के साथ-साथ यह तय करने भी काफी मदद मिलेगी कि आपको पाठकों तक अपनी बात किस तरह पहुँचानी चाहिये। यदि आप अपने पाठकों से अवगत नहीं हैं तो जनसांख्यिकीय को ध्यान में रखकर लिखिए अर्थात आप उन लोगों को खयाल में रखकर लिखिये जो आपके लेख को पढ़ेंगे जैसा कि ऑनलाइन लेखक या ब्लॉगर्स करते हैं।

कभी भी लिखना शुरू करने से पहले आप यह समझने की कोशिश करें कि आप लिख क्यों रहे हैं। निम्नलिखित में से कोई भी लेखन का मकसद हो सकता है −

  • जानकारी उपलब्ध कराना
  • प्रभावित या प्रेरित करने के लिये
  • अपनी राय बताना
  • विचारों का प्रस्ताव
  • रिपोर्ट भेजना
  • संस्तुति
  • एक वांछित कार्रवाई
  • लक्ष्य प्राप्ति

उदाहरण के लिए यदि आपका उद्देश्य किसी उत्पाद को बेचना है या आप कोई सेवा प्रदान करते हैं और उसके लिये किसी को ग्राहक बनाना चाहतें हैं, या फिर आप किसी अभियान का प्रचार कर रहे हैं तो आपको खुद से कुछ इस तरह के सवाल पूछें जैसे कि −

  • मेरे संभावित पाठक कौन हैं?
  • मेरे संभावित लक्षित पाठकों की पृष्ठभूमि (बैक्ग्राउंड) क्या है?
  • वे कहाँ रहते हैं और उनकी उम्र कितनी हैं?
  • उनकी रुचियाँ और प्राथमिकताएं क्या हैं?

ये प्रश्न आपके लेखन के उद्देश्य को निर्धारित करेंगे।

दस्तावेज़ लेखन

एक बार जब आपने यह जान लिया कि आपके पाठक कौन हैं तो आपका अगला कदम यह होगा कि आप कोशिश ये करें कि अपने डॉक्यूमेन्ट में उन तथ्यों और सूचनाओं को शामिल करें जिसे आपके पाठक जरूरी समझते हैं। ऐसा अाप खुद से सवाल (WH-questions) पूछकर कर सकते हैं।

  • इन सवालों (WH-questions) के जवाब दें − "कौन? क्या? क्यों? कहाँ? कब? किसको? कैसे?" इन सवालों के जवाब आपके लेखन हेतु विषय-वस्तु पर सामग्री तैयार करने के लिये काफी मददगार साबित होंगे।

  • यह तय करें कि आपके लेख की शुरुआत और अंत कैसा हो − उस विषय पर आपके पास जितनी भी जानकारियाँ उपल्ब्ध हैं आप उन्हें एक जगह रख लीजिये, अब इनको एक-एक करके पढ़ते जाइये और ऐसे तथ्य या सूचना जो उस संदर्भ में सही नहीं बैठ रहे उन्हें छाँटते चले जाइये। इसके बाद आप वो आइडिया (विचार) चुनिये जो आपके पाठकों को सबसे अधिक प्रभावित करेंगी और उस विचार को अपनी लेख की शुरूआत में लिखिये। अंत में कु़छ इस तरह के विचार लिखिये जिसमें साफ-साफ आपके पूरे लेख का सार समाहित हो।

  • दूसरे व्यक्ति से राय लें − अपने किसी भी लिखित पाठ को सब्मिट (जमा) करने से पहले इसे किसी दूसरे व्यक्ति से अवश्य जाँच करा लें। इसका उद्देश्य यह है कि जब दूसरा व्यक्ति आपके लेख को पढ़कर अपनी राय बताता है तो वह आपके लेखन में आपकी भावनाओं और निजी विचारों को आड़े आने से बचाता है। लेकिन यदि लेखन गोपनीय है या इसे साझा (शेयर) करने की अनुमति नहीं है तो ऐसा न करें।

  • लोगों के सुझाव पर चर्चा करें और अपने लेख में सुधार करें − अपने मित्रों के सुझावों पर विचार करें और विषयानुरूप जो विचार आपको ठीक लगे उसे अपने लेख में शामिल कर लें।

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